नन्ही लाल टोपी वाली

नन्ही लाल टोपी वाली · Page 3 of 8

चालाक भेड़िया

एक भेड़िया एक पेड़ के पीछे से निकल आया, उसकी मुस्कान ऐसी थी जो उसकी आँखों तक नहीं पहुँच पाती थी।

"सुप्रभात, नन्ही बच्ची", उसने मीठी आवाज़ में कहा। "इतने सुंदर दिन में तुम कहाँ जा रही हो?"

"अपनी दादी के घर", उसने विनम्रता से जवाब दिया। "उनकी तबीयत ठीक नहीं है, इसलिए मैं उनके लिए रोटी और शहद ले जा रही हूँ।"

"कितनी समझदार बच्ची हो", भेड़िये ने कहा, मन में पहले से ही एक योजना बनाते हुए। "रास्ते में उनके लिए कुछ फूल क्यों नहीं चुन लेतीं? उन्हें ज़रूर पसंद आएंगे।"