
हेजहॉग जो गले लगना चाहता था · Page 4 of 7
बूढ़ा टॉमसन कछुआ
"इतना उदास मुँह क्यों बना रखा है, नन्हे दोस्त?" एक धीमी, मीठी आवाज़ आई।
यह टॉमसन था, बूढ़ा कछुआ, जो बगीचे में इतने लंबे समय से रह रहा था कि किसी को याद भी नहीं था।
पिप ने उसे सब कुछ बताया — वे चुभन, वे चीख़ें, और पास आने की चाहत रखते हुए भी हमेशा दूर ही रह जाने का अकेलापन।
टॉमसन ने धीरे से सिर हिलाया। "मेरा भी तो एक सख़्त कवच है, जानते हो। मैं इस बारे में थोड़ा-बहुत समझता हूँ।"
"सच में?" पिप ने पूछा।
"प्यार सिर्फ एक ही रूप में नहीं आता," टॉमसन ने कहा। "शायद अब वक़्त आ गया है कि हम तुम्हारा रूप ढूँढें।"