सिंड्रेला

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राख के बीच जीवन

एक समय की बात है, एक भली लड़की अपनी सौतेली माँ और दो सौतेली बहनों के साथ रहती थी।

उसके पिता का देहांत हो चुका था, और सौतेली माँ उससे सुबह से रात तक खाना पकवाती, घर की सफ़ाई करवाती और बर्तन मँजवाती थी।

हर लंबे दिन के अंत में, वह चूल्हे के पास बैठकर खुद को गर्म रखती, राख और अंगारों के बीच सुस्ताती। इसी वजह से लोग उसे सिंड्रेला कहने लगे।

इतना सब सहते हुए भी सिंड्रेला हमेशा कोमल और दयालु बनी रही, और मुस्कुराने का कोई न कोई छोटा-सा बहाना ढूँढ ही लेती थी।